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कल जब मैं मर जाऊँगा (#Aalokry)

कल जब मैं मर जाऊँगा। तब तुम मेरे लिए आंसू बहाआगे  पर मुझे पता नही चलेगा तो  उसके बजाय  आज तुम मेरी इम्पॉर्टन्टस को महसूस क...

25 May 2013


 MAHSUS KARO IN SABKO.........


*  I Give Thanks for Everything I Have Achived
*  Every day and every way I am be coming Better than Better
*  I am Rich
*  I am Healthy
*  I am Important
*  I am special
*  I am Happiest Person in the World
*  I am Perfect Just as I am
*  The Universe is a friendly Place
*  I am more Powerful
*  I Have Unique talents
*  I am Intelligent, Strong & Confident
*  I am Deserving of all good things
*  I have more than enough money for everything I want
*  I have my dream home
*  I have my dream car
*  I Enjoy all the Laxuries of life
*  I attract money like a magnet
*  I receive Unexpected Gifts
*  Thank you god for an increase in money now
*  Money comes to me every day in every way
*  My income is growing higher and higher now
*  I live in Luxury
*  My mind is a Powerful magnet for profitable ideas
*  My success is Unlimited now
*  I am creat in that my path is always Perfect for me
*  I give thanks that I am now Rich, Well and Happy……..



29 March 2013



असफल होने के लिए आगे ना बढें !


Don't Succeed To Fail
Don’t Succeed To Fail
असफल होने  से  मेरा  मतलब  है  की  आप  वो  नहीं  कर  पाते  हैं  जो  आप  करना  चाहते  हैं . For e.g अपना  कोई  business start करना  चाहते  हैं , एक successful  actor, chef , choreographer, fashion designer, social activist  , या  फिर  कुछ  और  बनना  चाहते  हैं ; लेकिन बन नहीं पाते.
और  आगे बढ़ने  से  मेरा  मतलब  है  आप  society की  नज़रों  में grow करते   जाते  हैं …. आप  अच्छी  designation पर पहुँच  जाते  हैं , अपने  लिए  गाड़ी -बंगला  खरीद  लेते  हैं  और  ऐसी  ही अन्य  materialistic चीजें  जुटा  लेते  हैं .
Friends, हममें से  बहुत  से  लोग  किसी  न  किसी  सपने  के  साथ  जीते  हैं  की  हम  आगे  चल  कर  कुछ  बड़ा  करेंगे , कुछ  महान  करेंगे ,  पर  किसी  न  किसी  वजह  से  उन  dreams को  postpone करते  जाते  हैं  और  life जिस  flow में  चल  रही  है  उसी  flow में  आगे  बढ़ते  चले  जाते  हैं ….हम  पढाई  पूरी  करते  हैं , किसी  नौकरी  या  business में  लग  जाते  हैं , चाहे  वो  हमारे  मन  का  हो  या  नहीं ….और  फिर  उसी  में  grow करने  लगते  हैं ….पैसे  कमाने  लगते  हैं , और  जब पैसे  आते  हैं  तो  हम  उन्हें  सही  जगह  invest करने  के  बारे  में  सोचने  लगते  हैं ; as a result कुछ  ही  सालों  में  हमारे  पास  ऐशो  आराम  की  ढेर  सारी चीजें  हो  जाती  हैं . कुछ  हमने  down payment पे  ली  होती  हैं  तो  कुछ  EMI पर . ज़िन्दगी  यूँही  चलती  जाती  है  पर  जब  आप  थोडा  settle हो  जाते  हैं  तो  आप अपनी  life में  एक  void एक  खालीपन  महसूस  करने  लगते  हैं …सब  कुछ  होते  हुए  भी  आप  satisfy नहीं  हो  पाते  और  एक  बार  फिर  आपको  लगता  है  की  अपने  दिल  की  सुनी  जाये …अपने  सपनो  का पीछा किया  जाए ;….इतने  दिनों  तक  ignore करने  के  बाद  भी  वो  सपने  मरते  नहीं   क्योंकि  उसका  बीज  आपके  भीतर  ही  कहीं  होता  है , और जब उसे आपका attention मिलता है तो वो फिर से पनपने लगता है ! और आप  एक  बार  फिर  उन  सपनो  को  पूरा  करने  के  लिए  बेचैन हो जाते हैं …ideas  सोचते  हैं , प्लान  बनाते  हैं ..पर  in most of the cases ये  plans ये  ideas धरे  के धरे  रह  जाते  हैं …
ऐसा क्यों होता है ?
क्योंकि  आपकी  risk taking capacity बहुत  कम  हो  चुकी  होती  है ….अब  आप  एक  अलग  standard of living or life style के  आदि  हो  चुके  होते  हैं , आपकी  liabilities बढ़  चुकी  होती  हैं , आप  अपनी  job छोड़ने  या  अपना  business change करने  का  खतरा  नहीं  उठा  पाते  , आप  खुद  को  ऐसी  जगह  पाते  हैं  जहाँ  एक  महीने  भी  खाली  बैठना  impossible लगता  है !! और  यही  आपका  FAILURE बन  जाता  है . अब  आपको  अनचाहे  मन  से  उसी  काम  में  खुद  को  लगाए  रखना  पड़ता  है  जो  आपको  पैसे  तो  देता  है  पर  संतोष  नहीं  दे  पाता और ज्यादातर  cases में न पर्याप्त पैसे दे पाता है और ना ही संतोष.  .
तो  क्या  करना  चाहिए ?
यदि  आप  अभी  तक  इस  तरह  की  condition में  नहीं  फंसे  हैं  तो  आप  इन  बातों  को  ध्यान  में  रखिये :
1)      उस  काम  में  grow करने  की  कोशिश  न  करें  जिसे  आप  दिल  से  like नहीं  करते .  और  भले  ही  हम  अपना  passion ना  जान  पाएं  पर  ये  जानना  आसान  होता  है  की  हम  क्या  like नहीं  करते . इसलिए  ऐसे  काम  में  succeed होना  जिसे  आप  like  ही  नहीं  करते  बेकार  है . For e.g आप  किसी  sales  and marketing job में  हैं  और  ये  काम  आपको  पसंद  नहीं है तो  आप  इस  job में  promotion पाने  के  लिए  काम  मत  करिए , बस  job चलाने  के  लिए  काम  करिए . ये थोडा मुश्किल है , पर आपको ये करना होगा , क्योंकि  जो  काम  आपको  पसंद  नहीं  उससे  पैसा  कामाने  की आदत  डालना  आपको  असफल  कर  सकता है .
2)      जब  तक  आप  अपने  मन  का  काम  नही  पा  जाते  तब  तक  कुछ  ऐसा  करने  की  कोशिश  कीजिये  जो  आपको  अधिक   से  अधिक  free time दे  सके . और  इस  free time को  आप  अपने  goals achieve करने  में  लगाइए .
3)      अपनी  liabilities को  limited रखिये , ख़ास  तौर  से  कोई  ऐसा  loan मत  लीजिये  जिसकी  EMI भरने  के  लिए  आपको  अपने  काम  में  लगे  रहना  मजबूरी  बन  जाए . ऐसे  loans लेना  तभी  ठीक  होगा  जब  पैसा  आपके  मन  के  काम  से  आ  रहा  हो .
4)      अपने  real interest और  liking को  explore करते  रहिये , और  जहाँ  तक  हो  सके  उस  दिशा  में  कुछ  steps लेने  की  कोशिश  कीजिये . भले  ये  steps बहुत  ही  छोटे  क्यों  न  हों , पर  इतना  निश्चित  है  की  हर एक  step आपको आपकी  मंजिल  के  करीब  ले  जायेगा .
क्या  करें  अगर  already ऐसी  condition में  पहुँच  चुके  हों ?
It means अब  आपके  लिए  आपकी  जॉब  या  जो  काम  आप  कर  रहे  हैं वो  करना  मजबूरी  बन  चुकी  हो , क्योंकि  इसको  छोड़ने  का  मतलब  एक  निश्चित  financial crisis है .  ऐसे  में  क्या  करना  चाहिए ???  Frankly telling, मुझे  नहीं  पता  की  ऐसे  में  क्या  किया  जा  सकता  है ….बताने  को  तो  मैं  कई  चीजें  लिख  सकता  हूँ , पर  मेरी  हमेशा  यही  कोशिश  होती  है  की  मैं  ऐसे  ideas share करूँ  जो  practical हों , जिन्हें आप सचमुच  apply कर  सकें .  हाँ , एक  approach शायद  कुछ  cases में  काम  कर जाये ….आप  जो  करना  चाहते  हैं  उसे  Virtually करिए .
Of course इसकी  limits हैं  और  हर  काम  इस  तरह  से  नहीं  किया  जा  सकता , पर  in case आपका  goal  इस तरह से achieve किया  जा  सकता  है  तो  आप  try कर  सकते  हैं .
Virtually करने  का  मतलब ?
It means, आप  internet का  use  करते  हुए  अपने  मन  का  काम  करिए .  इसके  लिए  आपको  अपने  interest से  related website / blog बनाना  या  बनवाना  होगा.
( To get a Ready To Publish professional blog at a very competitive rate please contactChandan Pande , Email: makemyweblog@gmail.com )
For instance, अगर  आप  एक  Chef बनना  चाहते  हैं  और  अभी  किसी  IT जॉब  में  फंसे  हुए   हैं  तो  आप  एक  Food blog बनाइये  और  उसपे तरह – तरह  की  recipe और  कुकिंग-टिप्स  post करिए . अगर  आप  अपनी  Travel Company शुरू  करना  चाहते  हैं  तो  travel related blog बनाइये …and  so on.
इससे  क्या  फायदा होगा ?
  • आप  घर  बैठे  अपने  interest से  related field में  कुछ  progress कर  पायेंगे . और  चूँकि  इस  काम  को  आप  कहीं  भी  और  कभी  भी  कर  सकते  हैं  इसलिए  इसके चलते रहने और आगे बढ़ने  के  chances कहीं  अधिक  हैं .
  • आपकी  us  field में  knowledge बेहतर  होती  जाएगी . और  अगर  कभी  future में  आप  physically ऐसा करना  चाहेंगे  तो  ये  knowledge बहुत  काम आयेगी .
  • लगातार  blog पर  काम  करने  से  आपको  कई  लोग  जानेंगे  और  हो  सकता  है  यहीं  से  कोई  opportunity निकल  आये  जो  आपको  आपके  interest से  related एक  well-paying opportunity दिला  सके .
  • आपका  blog आपको  एक  alternate source of income भी  दे  सकता  है  जो  ultimately आपकी  liabilities को  कम  करने  में  मददगार  होगा .
 Friends, मैं  lucky हूँ  की  समय  रहते  मेरे अन्दर ये समझ आ गयी कि  अपने दिल का काम find  करने से पहले materialistically  expand करना बेवकूफी है ; आप भी  जब  तक  उस  काम  से  पैसा  नहीं  कमाने  लगते  जिसको  लेकर  आप  passionate हैं तब तक  खुद  को expand करने से रोकिये. George Burns  ने कहा भी है कि  जिस  चीज  को  आप  चाहते  हैं  उसमे  असफल  होना  जिस  चीज  से  आप  नफरत  करते  हैं  उसमे  सफल  होने  से  बेहतर  है .
आप  चाहे  जैसी  condition में  हों …surrender मत  कीजिये ….अपने  लक्ष्य  को  पाने  के  लिए  लड़ते  रहिये … boxing match की  तरह  ज़िन्दगी  के  खेल  में  भी  हारता  वो नहीं  जो  गिर  जाता  है  , हारता  वो  है  जो  उठने  से  इनकार  कर  देता  है …आप  भी  चाहे  जितनी  बार  गिरें  हार  मत  मानिए  , उठिए  और तमाम मुश्किलों के बावजूद  अपना  लक्ष्य  प्राप्त  कीजिये .
All the best!

26 March 2013

साधु की सीख

साधु की सीख


साधु की सीख
किसी गाँव मे एक साधु रहा करता था ,वो जब भी नाचता तो बारिस होती थी . अतः गाव के लोगों को जब भी बारिस की जरूरत होती थी ,तो वे लोग साधु के पास जाते और उनसे अनुरोध करते की वे नाचे , और जब वो नाचने लगता तो बारिस ज़रूर होती.
कुछ दिनों बाद चार लड़के शहर से गाँव में घूमने आये, जब उन्हें यह बात मालूम हुई की किसी साधू के नाचने से बारिस होती है तो उन्हें यकीन नहीं हुआ .
शहरी पढाई लिखाई के घमंड में उन्होंने गाँव वालों को चुनौती दे दी कि हम भी नाचेंगे तो बारिस होगी और अगर हमारे नाचने से नहीं हुई तो उस साधु के नाचने से भी नहीं होगी.फिर क्या था अगले दिन सुबह-सुबह ही गाँव वाले उन लड़कों को लेकर साधु की कुटिया पर पहुंचे.
साधु को सारी बात बताई गयी , फिर लड़कों ने नाचना शुरू किया , आधे घंटे बीते और पहला लड़का थक कर बैठ गया पर बादल नहीं दिखे , कुछ देर में दूसरे ने भी यही किया और एक घंटा बीतते-बीतते बाकी दोनों लड़के भी थक कर बैठ गए, पर बारिश नहीं हुई.
अब साधु की बारी थी , उसने नाचना शुरू किया, एक घंटा बीता, बारिश नहीं हुई, साधु नाचता रहा …दो घंटा बीता बारिश नहीं हुई….पर साधु तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था ,धीरे-धीरे शाम ढलने लगी कि तभी बादलों की गड़गडाहत सुनाई दी और ज़ोरों की बारिश होने लगी . लड़के दंग रह गए
और तुरंत साधु से क्षमा मांगी और पूछा-
” बाबा भला ऐसा क्यों हुआ कि हमारे नाचने से बारिस नहीं हुई और आपके नाचने से हो गयी ?”
साधु ने उत्तर दिया – ” जब मैं नाचता हूँ तो दो बातों का ध्यान रखता हूँ , पहली बात मैं ये सोचता हूँ कि अगर मैं नाचूँगा तो बारिस को होना ही पड़ेगा और दूसरी ये कि मैं तब तक नाचूँगा जब तक कि बारिस न हो जाये .”..........

The Power of Kundalni

कुंडलिनी शक्ति.....


मनुष्य शरीर स्थित कुंडलिनी शक्ति में जो चक्र स्थित होते हैं उनकी संख्या सात बताई गई है। इन चक्रों के विषय में अत्यंत महत्वपूर्ण एवं गोपनीय जानकारी यहां दी गई है। यह जानकारी शास्त्रीय, प्रामाणिक एवं तथ्यात्मक है-

(1) मूलाधार चक्र - गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला 'आधार चक्र' है । आधार चक्र का ही एक दूसरा नाम मूलाधार चक्र भी है। वहाँ वीरता और आनन्द भाव का निवास है

(2) स्वाधिष्ठान चक्र - इसके बाद स्वाधिष्ठान चक्र लिंग मूल में है । उसकी छ: पंखुरियाँ हैं । इसके जाग्रत होने पर क्रूरता,गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश होता है

(3) मणिपूर चक्र -
नाभि में दस दल वाला मणिचूर चक्र है । यह प्रसुप्त पड़ा रहे तो तृष्णा, ईष्र्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह, आदि कषाय-कल्मष मन में लड़ जमाये पड़े रहते हैं

(4) अनाहत चक्र -
हृदय स्थान में अनाहत चक्र है । यह बारह पंखरियों वाला है । यह सोता रहे तो लिप्सा, कपट, तोड़ -फोड़, कुतर्क, चिन्ता, मोह, दम्भ, अविवेक अहंकार से भरा रहेगा । जागरण होने पर यह सब दुर्गुण हट जायेंगे ।

(5) विशुद्धख्य चक्र -
कण्ठ में विशुद्धख्य चक्र यह सरस्वती का स्थान है । यह सोलह पंखुरियों वाला है। यहाँ सोलह कलाएँ सोलह विभूतियाँ विद्यमान है

(6) आज्ञाचक्र - भू्रमध्य में आज्ञा चक्र है, यहाँ '?' उद्गीय, हूँ, फट, विषद, स्वधा स्वहा, सप्त स्वर आदि का निवास है । इस आज्ञा चक्र का जागरण होने से यह सभी शक्तियाँ जाग पड़ती हैं

(7) सहस्रार चक्र - सहस्रार की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में है । शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथियों से सम्बन्ध रैटिकुलर एक्टिवेटिंग सिस्टम का अस्तित्व है । वहाँ से जैवीय विद्युत का स्वयंभू प्रवाह उभरता है

कुण्डलिनी जागरण: विधि और विज्ञान::
कुंडलिनी जागरण का अर्थ है मनुष्य को प्राप्त महानशक्ति को जाग्रत करना। यह शक्ति सभी मनुष्यों में सुप्त पड़ी रहती है। कुण्डली शक्ति उस ऊर्जा का नाम है जो हर मनुष्य में जन्मजात पायी जाती है। यह शक्ति बिना किसी भेदभाव के हर मनुष्य को प्राप्त है। इसे जगाने के लिए प्रयास या साधना करनी पड़ती है। जिस प्रकार एक नन्हें से बीज में वृक्ष बनने की शक्ति या क्षमता होती है। ठीक इसी प्रकार मनुष्य में महान बनने की, सर्वसमर्थ बनने की एवं शक्तिशाली बनने की क्षमता होती है। कुंडली जागरण के लिए साधक को शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक स्तर पर साधना या प्रयास पुरुषार्थ करना पड़ता है। जप, तप, व्रत-उपवास, पूजा-पाठ, योग आदि के माध्यम से साधक अपनी शारीरिक एवं मानसिक, अशुद्धियों, कमियों और बुराइयों को दूर कर सोई पड़ी शक्तियों को जगाता है। अत: हम कह सकते हैं कि विभिन्न उपायों से अपनी अज्ञात, गुप्त एवं सोई पड़ी शक्तियों का जागरण ही कुंडली जागरण है। योग और अध्यात्म की भाषा में इस कुंडलीनी शक्ति का निवास रीढ़ की हड्डी के समानांतर स्थित छ: चक्रों में माना गया है। कुण्डलिनी की शक्ति के मूल तक पहुंचने के मार्ग में छ: फाटक है अथवा कह सकते हैं कि छ: ताले लगे हुए है। यह फाटक या ताले खोलकर ही कोई जीव उन शक्ति केंद्रों तक पहुंच सकता है। इन छ: अवरोधों को आध्यात्मिक भाषा में षट्-चक्र कहते हैं। ये चक्र क्रमश: इस प्रकार है: मूलधार चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र, मणिपुर चक्र, अनाहत चक्र, विशुद्धाख्य चक्र, आज्ञाचक्र। साधक क्रमश: एक-एक चक्र को जाग्रत करते हुए। अंतिम तक पहुंचता है।..................

25 March 2013


एक अमीर आदमी था. उसने समुद्र मेँ अकेले घुमने के लिए एक नाव बनवाई.

छुट्टी के दिन वह नाव लेकर समुद्रकी सेर करने निकला. आधे समुद्र तक पहुचा ही था कि अचानक
एक जोरदार तुफान आया. उसकी नाव पुरी तरह से तहस-नहस हो गई लेकिन वह लाईफ जेकेट की मदद से
समुद्र मेँ कुद गया. जब तुफान शांत हुआ तब वह तेरता तेरता एक टापु पर पहुचा लेकिन वहाभी कोई नही था.
टापु के चारो और समुद्र के अलावा कुछ भी नजर नही आ रहा था. उस आदमी ने सोचा कि अब पुरी जिदंगी मेँ
किसी का कभी भी बुरा नही किया तो मेरे साथ ऐसा क्यु हुआ..? उस आदमी को लगा कि भगवान ने मौत सेबचाया तो आगे
का रास्ता भी भगवान ही बताएगा. धीरे धीरे वह वहा पर उगे झाड-पत्ते खाकर दिन बिताने लगा.
अब धीरे-धीरे उसकी श्रध्दा टुटने लगी भगवान पर से उसका विश्वास उठ गया. उसको लगा कि इस दुनिया मेँ भगवान है
हि नही.! फिर उसने सोचा कि अब पुरी जिंदगी यही इस टापु पर बितानी है तो क्यु ना एक झोपडी बना लु..?
फिर उसने झाड कि डालियो और पत्तो से एक छोटी सी झोपडी बनाई. उसको लगा कि, हाश, आज से झोपडी मेँ सोने
को मिलेगा आज से बाहर नही सोना पडेगा.रात हुई
ही थी कि अचानक मौसम बदला बिजलीया जोर जोर से गिडगिराने लगी.! तभी अचानक एक बिजली उस झोपडी पर आ
गिरी और झोपडी धधकते हुए जलने लगी. यह देखकर वह आदमी टुट गया आसमान की तरफ देखकर बोला तु भगवान नही , राक्षस है,
तुजमे दया जैसा कुछ है ही नही तु बहुत क्रुर है. हताश होकर सर पर हाथ रखकर रो रहा था. कि अचानक एक नाव टापु के पास आई.
नाव से उतरकर दो आदमी बाहर आये. और बोले कि, हम तुमे बचाने आये है, तुम्हारा जलता हुआ झोपडा देखा तो लगा कि कोई
उस टापु पर मुसीबत मेँ है.! अगर तुम अपनी झोपडी नही जलाते तो हमे पता नही चलता कि टापु पर कोई है! उस आदमी कि आँखो से आँसु
गिरने लगे. उसने ईश्वर से माफी माँगी और बोलाकि मुझे क्या पता कि आपने मुझे बचाने के लिए मेरी झोपडी जलाई थी !