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कल जब मैं मर जाऊँगा (#Aalokry)

कल जब मैं मर जाऊँगा। तब तुम मेरे लिए आंसू बहाआगे  पर मुझे पता नही चलेगा तो  उसके बजाय  आज तुम मेरी इम्पॉर्टन्टस को महसूस क...

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10 July 2020

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नीचे आप AaloKS चैनल की और भी दूसरी विडियो देख सकते है .....

बुरे वक़्त में हमेशा अपने ही काम आते हैं || it's True ||


तुम बस अपने आप से मत हारना ॥ You just don't give up on yourself https://www.youtube.com/watch?v=M98zf...

वक़्त बहुत अच्छा जवाब देता है ||Heart Touching Motivational Video||


माँ का सम्मान कब कम होता है || It's True ||

वो बेटा कैसा बेटा है ? जिसके सामने माँ बाप की बेज्जती हो जाए और वो चुप रहे ||Heart Touching Video
https://www.youtube.com/watch?v=zIheU... दुआ कब कबूल होती है || Dua kab Qubool hoti hai || https://www.youtube.com/watch?v=0LGan... जब आप खुश होते है तो आप उसे याद करते है https://www.youtube.com/watch?v=mqfHo... कहाँ आपका ना होना ही बेहतर है...|| https://www.youtube.com/watch?v=QiJMZ... How to open blocked websites in mobile, मोबाइल में ब्लॉक्ड वेबसाइट कैसे खोलें https://www.youtube.com/watch?v=w6PRc... बिना Watermark वाले TikTok Video कैसे डाउनलोड करे https://www.youtube.com/watch?v=Vj1ga... अगर आपका मूड खराब है तो ये आपके लिए है .... https://www.youtube.com/watch?v=aV9-O... ===========================================================

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22 December 2019

सबसे ऊँची प्रार्थना

🔥सबसे ऊँची प्रार्थना🔥

एक व्यक्ति जो मृत्यु के करीब था, मृत्यु से पहले अपने बेटे को चाँदी के सिक्कों से भरा थैला देता है और बताता है की "जब भी इस थैले से चाँदी के सिक्के खत्म हो जाएँ तो मैं तुम्हें एक प्रार्थना बताता हूँ, उसे दोहराने से चाँदी के सिक्के फिर से भरने लग जाएँगे । उसने बेटे के कान में चार शब्दों की प्रार्थना कही और वह मर गया । अब बेटा चाँदी के सिक्कों से भरा थैला पाकर आनंदित हो उठा और उसे खर्च करने में लग गया । वह थैला इतना बड़ा था की उसे खर्च करने में कई साल बीत गए, इस बीच वह प्रार्थना भूल गया । जब थैला खत्म होने को आया तब उसे याद आया कि "अरे! वह चार शब्दों की प्रार्थना क्या थी ।" उसने बहुत याद किया, उसे याद ही नहीं आया ।

अब वह लोगों से पूँछने लगा । पहले पड़ोसी से पूछता है की "ऐसी कोई प्रार्थना तुम जानते हो क्या, जिसमें चार शब्द हैं । पड़ोसी ने कहा, "हाँ एक चार शब्दों की प्रार्थना मुझे मालूम है, "ईश्वर मेरी मदद करो " उसने सुना और उसे लगा की ये वे शब्द नहीं थे, कुछ अलग थे । कुछ सुना होता है तो हमें जाना-पहचाना सा लगता है । फिर भी उसने वह शब्द बहुत बार दोहराए, लेकिन चाँदी के सिक्के नहीं बढ़े तो वह बहुत दुःखी हुआ ।

फिर एक फादर से मिला, उन्होंने बताया की "ईश्वर तुम महान हो" ये चार शब्दों की प्रार्थना हो सकती है, मगर इसके दोहराने से भी थैला नहीं भरा । वह एक नेता से मिला, उसने कहा "ईश्वर को वोट दो" यह प्रार्थना भी कारगर साबित नहीं हुई । वह बहुत उदास हुआ उसने सभी से मिलकर देखा मगर उसे वह प्रार्थना नहीं मिली, जो पिताजी ने बताई थी ।

वह उदास होकर घर में बैठा हुआ था तब एक भिखारी उसके दरवाजे पर आया । उसने कहा, "सुबह से कुछ नहीं खाया, खाने के लिए कुछ हो तो दो ।" उस लड़के ने बचा हुआ खाना भिखारी को दे दिया । उस भिखारी ने खाना खाकर बर्तन वापस लौटाया और ईश्वर से प्रार्थना की,
"हे ईश्वर ! आपका धन्यवाद ।"
अचानक वह चौंक पड़ा और चिल्लाया की
"अरे! यही तो वह चार शब्द थे ।" उसने वे शब्द दोहराने शुरू किए-
( "हे ईश्वर आपका धन्यवाद".)
इससे समझें की जब उसने किसी की मदद की तब उसे वह मंत्र फिर से मिल गया ।
"हे ईश्वर ! आपका धन्यवाद ।"
यही उच्च प्रार्थना है
( क्योंकि जिस चीज के प्रति हम धन्यवाद देते हैं, वह चीज बढ़ती है )....#AalokRY #AalokDD

www.mysweetddiary.blogspot.com

24 March 2019

जब अपनी मौत के बाद बेटों ने मां से की बात, बताया कैसी है वह दुनिया.. ⭐⭐⭐⭐⭐

जब अपनी मौत के बाद बेटों ने मां से की बात, बताया कैसी है वह दुनिया….

अक्सर आपके मन में ख्याल आता होगा कि मरने के बाद क्या होता है? वह दुनिया कैसी होगी? क्या यहां से जाने के बाद वे लोग हमेें देख सकते हैं? क्या हम उनसे संपर्क कर सकते हैं। लेकिन अगर हम आपसे कहें कि दो बेटों ने एक दुर्घटना में मरने के एक महीने बाद अपनी मां से संपर्क किया तो आप क्या कहेंगे?

यह किस्सा है मुंबई का, मुंबई के बाइकुला इलाके में खुर्शीद भावनगरी और उनके पति रूमी भावनगरी रहा करते थे। इनके दो बेटे थे विस्पी और रत्तू। दोनों की लगभग 29 बरस की उम्र में फरवरी 1980 में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। दोनों बेटों का अचानक इस तरह चले जाना मां खुर्शीद बर्दाश्त नहीं कर पा रही थीं। वह गहरे दुख में डूब गईं उनकी बस एक ही इच्छा रह गई कि वह किसी तरह बेटों से संपर्क कर पाएं।

एक महीने बाद बेटों ने एक महिला को माध्यम बनाकर खुद उनसे संपर्क किया। इसके बाद वे ध्यान में लगातार मां से बातें करते रहे। एक दिन उन्होंने कहा कि हम जिस दुनिया में हैं उसके बारे में आपको बताना चाहते हैं आप उस पर एक किताब लिखिए ताकि औरों को भी इससे मदद मिले। आॅटोमैटिक हैंडराइटिंग के जरिए खुर्शीद भावनगरी ने किताब लिखी The Laws Of Spirit World । हिंदी में यह ‘जीवात्मा जगत के नियम‘ नाम से छपी।

अपनी मां से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हैलो मम्मी, पापा हम विस्पी और रत्तू हैं। हम अपनी मौत के कुछ समय बाद ही आत्माओं के जगत में पहुंच गए थे। यह ईश्वर की इच्छा थी, हमारे लिए क्या सही है यह उनसे बेहतर कोई नहीं जानता। हम जब चाहे आपको देख सकते हैं। लेकिन जब तक आप पूरी तरह से खुश और रिलेक्स नहीं होंगी आप हमसे बात नहीं कर सकतीं क्योंकि इसके लिए मन को एकाग्र करना पड़ता है।‘ इसके बाद उन्होंने बताया कि आत्माओं के जगत में धर्म की दीवार नहीं है, एक ही ईश्वर है। हम लोग धरती पर अच्छा मकसद लेकर आते हैं, लेकिन यहां आकर भूल जाते हैं।

हमें सही राह पर चलने में मदद करने के लिए हमारे कुछ गाइड होते हैं। मरने के बाद हम लोगों को अहसास होता है कि हमने अपने जीवन में क्या किया। उसी के हिसाब से हम अपना अगला जीवन चुनते हैं। जीवन में आने वाली कठिनाइयां हम खुद चुनते हैं ताकि उनके बीच हम अपने व्यक्तित्व और चरित्र का विकास कर सकें।
इस पूरी किताब में इस आत्मा जगत के नियम विस्तार से लिखे हैं जो न केवल पढ़ने में दिलचस्प हैं बल्कि उनको पढ़ने के बाद जीवन को समझने में मदद मिलती है। ......
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19 June 2017

जब सकारात्मक ऊर्जा कम होती है और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है

जब सकारात्मक ऊर्जा कम होती है और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है तो बात बिगडना शुरू हो जाती है, और जब बात बिगड़ती है तो मनुष्य और ज्यादा शिकायत करता है, रोता है, बिलखता है और दुखी होता है जिससे मुश्किल भी और ज्यादा बढ़ जाती है।
मेरा बाबा कहता है कि अगर कोई बात बिगड़ भी जाय तो रोना नहीं, दुखी नहीं होना बल्कि तुरंत उस शिवा को सुमिरना शुरू कर देना जिससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाएगी और देखना बात बननी शुरू हो जाएगी।
नम: शिवाय
अगर किसी के संचित कर्म पवित्र और शुद्ध है तो उसकी दृष्टि भी उतनी ही पवित्र होगी, उसके आसपास का वातावरण भी आनन्द से भरा होगा।
और जिस मनुष्य के संचित कर्म भारी होंगे तो उसको हर चीज़ बुरी दिखाई देगी, और उसके जीवन में अचानक कष्ट आते रहते है जो जीवन को असहाय बना देते हैं।।
आपकी सोच और विचारों के वार्तालाप को प्रकृति एक भौतिक रूप देती है। परन्तु आपके संचित कर्म आपकी बुद्धि को पकडते हैं जिसके अनुरूप आप सकारात्मक एवं नकारात्मक सोचते हैं।
सिर्फ साधना एवं निस्वार्थ सेवा पिछले बुरे कर्मों को निष्क्रिय करती है और शुभ कर्म पैदा कर सकती है।
नम: शिवाय
जब प्राण शक्ति कमजोर होती है तो मन अशान्त, चिडचिडा, और क्रोधी हो जाता है। और मनुष्य निस्तेज हो जाता है।
और जब प्राण शक्ति का प्रवाह उत्तम हो जाता है तब मनुष्य एकदम आनंदित और तेजोमय हो जाता है।
प्राण शक्ति के उत्तम प्रवाह के लिये शिव साधना सव्रोत्तम है।
नम: शिवाय
आप एक किरायेदार हो। आपका शरीर किराये का मकान है, इस मकान का असली मालिक काल है। एक दिन इस मकान का मालिक बिना सूचना के आएगा और आपको इससे बाहर निकाल देगा, और आप खड़े खड़े देखते रह जाओगे। तो क्यों ना इससे पहले ही इस मकान में रहकर निष्काम सेवा और साधना करके सांसारिक एवं आध्यात्मिक सफलता प्राप्त करली जाय। इसके साथ साथ शिव शिवा का श्रवण, संकीर्तन और मनन करलो तो इस आवागमन से मुक्ति मिल जाए।
नम: शिवाय
किसी के बारे में एक बार भी बुरा चाहना, आपके हजारों पुण्यों को श्रनभर में समाप्त कर देता है जो पतन का कारण बनता है।
और सभी के बारे में अच्छा, शुभ चाहने मात्र से भी पुण्य जागृत होते है जिनसे भाग्योदय होता है। जो भौतिक एवं आध्यात्मिक सुख देता है।
नम: शिवाय
अपने परिवार में किसी को दुखी नहीं करना,
अपने परिवार में किसी की आलोचना नहीं करना,
अपने परिवार में किसी को कष्ट नहीं देना।
आपका परिवार एक आत्म समूह है, इस शरीर को धारण करने से पहले आत्मा विचार करती है कि पिछले जन्मों में जो बिना सुलझे मसले रह गए हैं वह इस जन्म में आपके साथ रहकर सुलझाने हैं।
इसीलिए परिवार के सभी सदस्यों को प्रेम देना, और उनको स्वीकार करना, ऐसा करने से बहुत तेजी से आध्यात्मिक उन्नति होती है ।
नम: शिवाय
मैं जिसके बारे में सोचूंगा या जिसका नाम लूंगा, तुरंत मेरा मन उससे जुड जायेगा, और हम दोनों की ऊर्जा के बीच में एक पुल बन जायेगा, फिर उसकी ऊर्जा मेरी तरफ आयेगी और मेरी ऊर्जा उसकी तरफ जायेगी। कुछ समय के बाद हम दोनों की ऊर्जा बराबर हो जायेगी।
इसीलिए हमेशा दिव्य पुरुष (गुरु) के बारे में ही सोचना तो एक दिन आप और वह दिव्य पुरुष एक (अद्वैत) हो जाओगे।
क्या आप ने कभी अपने आपको देखा कि आप किस (अच्छा या बुरा) के बारे में सोचते हैं।
नम: शिवाय..... #Aalokry



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