MAHSUS KARO IN SABKO.........
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कल जब मैं मर जाऊँगा (#Aalokry)
कल जब मैं मर जाऊँगा। तब तुम मेरे लिए आंसू बहाआगे पर मुझे पता नही चलेगा तो उसके बजाय आज तुम मेरी इम्पॉर्टन्टस को महसूस क...
25 May 2013
MAHSUS KARO IN SABKO.........
25 April 2013
24 April 2013
03 April 2013
29 March 2013
असफल होने के लिए आगे ना बढें !
Don’t Succeed To Fail
असफल होने से मेरा मतलब है की आप वो नहीं कर पाते हैं जो आप करना चाहते हैं . For e.g अपना कोई business start करना चाहते हैं , एक successful actor, chef , choreographer, fashion designer, social activist , या फिर कुछ और बनना चाहते हैं ; लेकिन बन नहीं पाते.
और आगे बढ़ने से मेरा मतलब है आप society की नज़रों में grow करते जाते हैं …. आप अच्छी designation पर पहुँच जाते हैं , अपने लिए गाड़ी -बंगला खरीद लेते हैं और ऐसी ही अन्य materialistic चीजें जुटा लेते हैं .
Friends, हममें से बहुत से लोग किसी न किसी सपने के साथ जीते हैं की हम आगे चल कर कुछ बड़ा करेंगे , कुछ महान करेंगे , पर किसी न किसी वजह से उन dreams को postpone करते जाते हैं और life जिस flow में चल रही है उसी flow में आगे बढ़ते चले जाते हैं ….हम पढाई पूरी करते हैं , किसी नौकरी या business में लग जाते हैं , चाहे वो हमारे मन का हो या नहीं ….और फिर उसी में grow करने लगते हैं ….पैसे कमाने लगते हैं , और जब पैसे आते हैं तो हम उन्हें सही जगह invest करने के बारे में सोचने लगते हैं ; as a result कुछ ही सालों में हमारे पास ऐशो आराम की ढेर सारी चीजें हो जाती हैं . कुछ हमने down payment पे ली होती हैं तो कुछ EMI पर . ज़िन्दगी यूँही चलती जाती है पर जब आप थोडा settle हो जाते हैं तो आप अपनी life में एक void एक खालीपन महसूस करने लगते हैं …सब कुछ होते हुए भी आप satisfy नहीं हो पाते और एक बार फिर आपको लगता है की अपने दिल की सुनी जाये …अपने सपनो का पीछा किया जाए ;….इतने दिनों तक ignore करने के बाद भी वो सपने मरते नहीं क्योंकि उसका बीज आपके भीतर ही कहीं होता है , और जब उसे आपका attention मिलता है तो वो फिर से पनपने लगता है ! और आप एक बार फिर उन सपनो को पूरा करने के लिए बेचैन हो जाते हैं …ideas सोचते हैं , प्लान बनाते हैं ..पर in most of the cases ये plans ये ideas धरे के धरे रह जाते हैं …
ऐसा क्यों होता है ?
क्योंकि आपकी risk taking capacity बहुत कम हो चुकी होती है ….अब आप एक अलग standard of living or life style के आदि हो चुके होते हैं , आपकी liabilities बढ़ चुकी होती हैं , आप अपनी job छोड़ने या अपना business change करने का खतरा नहीं उठा पाते , आप खुद को ऐसी जगह पाते हैं जहाँ एक महीने भी खाली बैठना impossible लगता है !! और यही आपका FAILURE बन जाता है . अब आपको अनचाहे मन से उसी काम में खुद को लगाए रखना पड़ता है जो आपको पैसे तो देता है पर संतोष नहीं दे पाता और ज्यादातर cases में न पर्याप्त पैसे दे पाता है और ना ही संतोष. .
तो क्या करना चाहिए ?
यदि आप अभी तक इस तरह की condition में नहीं फंसे हैं तो आप इन बातों को ध्यान में रखिये :
1) उस काम में grow करने की कोशिश न करें जिसे आप दिल से like नहीं करते . और भले ही हम अपना passion ना जान पाएं पर ये जानना आसान होता है की हम क्या like नहीं करते . इसलिए ऐसे काम में succeed होना जिसे आप like ही नहीं करते बेकार है . For e.g आप किसी sales and marketing job में हैं और ये काम आपको पसंद नहीं है तो आप इस job में promotion पाने के लिए काम मत करिए , बस job चलाने के लिए काम करिए . ये थोडा मुश्किल है , पर आपको ये करना होगा , क्योंकि जो काम आपको पसंद नहीं उससे पैसा कामाने की आदत डालना आपको असफल कर सकता है .
2) जब तक आप अपने मन का काम नही पा जाते तब तक कुछ ऐसा करने की कोशिश कीजिये जो आपको अधिक से अधिक free time दे सके . और इस free time को आप अपने goals achieve करने में लगाइए .
3) अपनी liabilities को limited रखिये , ख़ास तौर से कोई ऐसा loan मत लीजिये जिसकी EMI भरने के लिए आपको अपने काम में लगे रहना मजबूरी बन जाए . ऐसे loans लेना तभी ठीक होगा जब पैसा आपके मन के काम से आ रहा हो .
4) अपने real interest और liking को explore करते रहिये , और जहाँ तक हो सके उस दिशा में कुछ steps लेने की कोशिश कीजिये . भले ये steps बहुत ही छोटे क्यों न हों , पर इतना निश्चित है की हर एक step आपको आपकी मंजिल के करीब ले जायेगा .
क्या करें अगर already ऐसी condition में पहुँच चुके हों ?
It means अब आपके लिए आपकी जॉब या जो काम आप कर रहे हैं वो करना मजबूरी बन चुकी हो , क्योंकि इसको छोड़ने का मतलब एक निश्चित financial crisis है . ऐसे में क्या करना चाहिए ??? Frankly telling, मुझे नहीं पता की ऐसे में क्या किया जा सकता है ….बताने को तो मैं कई चीजें लिख सकता हूँ , पर मेरी हमेशा यही कोशिश होती है की मैं ऐसे ideas share करूँ जो practical हों , जिन्हें आप सचमुच apply कर सकें . हाँ , एक approach शायद कुछ cases में काम कर जाये ….आप जो करना चाहते हैं उसे Virtually करिए .
Of course इसकी limits हैं और हर काम इस तरह से नहीं किया जा सकता , पर in case आपका goal इस तरह से achieve किया जा सकता है तो आप try कर सकते हैं .
Virtually करने का मतलब ?
It means, आप internet का use करते हुए अपने मन का काम करिए . इसके लिए आपको अपने interest से related website / blog बनाना या बनवाना होगा.
( To get a Ready To Publish professional blog at a very competitive rate please contactChandan Pande , Email: makemyweblog@gmail.com )
For instance, अगर आप एक Chef बनना चाहते हैं और अभी किसी IT जॉब में फंसे हुए हैं तो आप एक Food blog बनाइये और उसपे तरह – तरह की recipe और कुकिंग-टिप्स post करिए . अगर आप अपनी Travel Company शुरू करना चाहते हैं तो travel related blog बनाइये …and so on.
इससे क्या फायदा होगा ?
- आप घर बैठे अपने interest से related field में कुछ progress कर पायेंगे . और चूँकि इस काम को आप कहीं भी और कभी भी कर सकते हैं इसलिए इसके चलते रहने और आगे बढ़ने के chances कहीं अधिक हैं .
- आपकी us field में knowledge बेहतर होती जाएगी . और अगर कभी future में आप physically ऐसा करना चाहेंगे तो ये knowledge बहुत काम आयेगी .
- लगातार blog पर काम करने से आपको कई लोग जानेंगे और हो सकता है यहीं से कोई opportunity निकल आये जो आपको आपके interest से related एक well-paying opportunity दिला सके .
- आपका blog आपको एक alternate source of income भी दे सकता है जो ultimately आपकी liabilities को कम करने में मददगार होगा .
Friends, मैं lucky हूँ की समय रहते मेरे अन्दर ये समझ आ गयी कि अपने दिल का काम find करने से पहले materialistically expand करना बेवकूफी है ; आप भी जब तक उस काम से पैसा नहीं कमाने लगते जिसको लेकर आप passionate हैं तब तक खुद को expand करने से रोकिये. George Burns ने कहा भी है कि जिस चीज को आप चाहते हैं उसमे असफल होना जिस चीज से आप नफरत करते हैं उसमे सफल होने से बेहतर है .
आप चाहे जैसी condition में हों …surrender मत कीजिये ….अपने लक्ष्य को पाने के लिए लड़ते रहिये … boxing match की तरह ज़िन्दगी के खेल में भी हारता वो नहीं जो गिर जाता है , हारता वो है जो उठने से इनकार कर देता है …आप भी चाहे जितनी बार गिरें हार मत मानिए , उठिए और तमाम मुश्किलों के बावजूद अपना लक्ष्य प्राप्त कीजिये .
All the best!
26 March 2013
साधु की सीख
साधु की सीख
साधु की सीख
कुछ दिनों बाद चार लड़के शहर से गाँव में
घूमने आये, जब उन्हें यह बात मालूम हुई की किसी साधू के नाचने से बारिस
होती है तो उन्हें यकीन नहीं हुआ .
शहरी पढाई लिखाई के घमंड में उन्होंने
गाँव वालों को चुनौती दे दी कि हम भी नाचेंगे तो बारिस होगी और अगर हमारे
नाचने से नहीं हुई तो उस साधु के नाचने से भी नहीं होगी.फिर क्या था अगले
दिन सुबह-सुबह ही गाँव वाले उन लड़कों को लेकर साधु की कुटिया पर पहुंचे.
साधु को सारी बात बताई गयी , फिर लड़कों
ने नाचना शुरू किया , आधे घंटे बीते और पहला लड़का थक कर बैठ गया पर बादल
नहीं दिखे , कुछ देर में दूसरे ने भी यही किया और एक घंटा बीतते-बीतते बाकी
दोनों लड़के भी थक कर बैठ गए, पर बारिश नहीं हुई.
अब साधु की बारी थी , उसने नाचना शुरू
किया, एक घंटा बीता, बारिश नहीं हुई, साधु नाचता रहा …दो घंटा बीता बारिश
नहीं हुई….पर साधु तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था ,धीरे-धीरे शाम ढलने
लगी कि तभी बादलों की गड़गडाहत सुनाई दी और ज़ोरों की बारिश होने लगी .
लड़के दंग रह गए
और तुरंत साधु से क्षमा मांगी और पूछा-
और तुरंत साधु से क्षमा मांगी और पूछा-
” बाबा भला ऐसा क्यों हुआ कि हमारे नाचने से बारिस नहीं हुई और आपके नाचने से हो गयी ?”
साधु ने उत्तर दिया – ” जब मैं नाचता हूँ
तो दो बातों का ध्यान रखता हूँ , पहली बात मैं ये सोचता हूँ कि अगर मैं
नाचूँगा तो बारिस को होना ही पड़ेगा और दूसरी ये कि मैं तब तक नाचूँगा जब
तक कि बारिस न हो जाये .”..........The Power of Kundalni
कुंडलिनी शक्ति.....
मनुष्य शरीर स्थित कुंडलिनी शक्ति में जो चक्र स्थित होते हैं उनकी संख्या सात बताई गई है। इन चक्रों के विषय में अत्यंत महत्वपूर्ण एवं गोपनीय जानकारी यहां दी गई है। यह जानकारी शास्त्रीय, प्रामाणिक एवं तथ्यात्मक है-
(1) मूलाधार चक्र - गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला 'आधार चक्र' है । आधार चक्र का ही एक दूसरा नाम मूलाधार चक्र भी है। वहाँ वीरता और आनन्द भाव का निवास है ।
(2) स्वाधिष्ठान चक्र - इसके बाद स्वाधिष्ठान चक्र लिंग मूल में है । उसकी छ: पंखुरियाँ हैं । इसके जाग्रत होने पर क्रूरता,गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश होता है ।
(3) मणिपूर चक्र - नाभि में दस दल वाला मणिचूर चक्र है । यह प्रसुप्त पड़ा रहे तो तृष्णा, ईष्र्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह, आदि कषाय-कल्मष मन में लड़ जमाये पड़े रहते हैं ।
(4) अनाहत चक्र - हृदय स्थान में अनाहत चक्र है । यह बारह पंखरियों वाला है । यह सोता रहे तो लिप्सा, कपट, तोड़ -फोड़, कुतर्क, चिन्ता, मोह, दम्भ, अविवेक अहंकार से भरा रहेगा । जागरण होने पर यह सब दुर्गुण हट जायेंगे ।
(5) विशुद्धख्य चक्र - कण्ठ में विशुद्धख्य चक्र यह सरस्वती का स्थान है । यह सोलह पंखुरियों वाला है। यहाँ सोलह कलाएँ सोलह विभूतियाँ विद्यमान है
(6) आज्ञाचक्र - भू्रमध्य में आज्ञा चक्र है, यहाँ '?' उद्गीय, हूँ, फट, विषद, स्वधा स्वहा, सप्त स्वर आदि का निवास है । इस आज्ञा चक्र का जागरण होने से यह सभी शक्तियाँ जाग पड़ती हैं ।
(7) सहस्रार चक्र - सहस्रार की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में है । शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथियों से सम्बन्ध रैटिकुलर एक्टिवेटिंग सिस्टम का अस्तित्व है । वहाँ से जैवीय विद्युत का स्वयंभू प्रवाह उभरता है ।
कुण्डलिनी जागरण: विधि और विज्ञान::
कुंडलिनी जागरण का अर्थ है मनुष्य को प्राप्त महानशक्ति को जाग्रत करना। यह शक्ति सभी मनुष्यों में सुप्त पड़ी रहती है। कुण्डली शक्ति उस ऊर्जा का नाम है जो हर मनुष्य में जन्मजात पायी जाती है। यह शक्ति बिना किसी भेदभाव के हर मनुष्य को प्राप्त है। इसे जगाने के लिए प्रयास या साधना करनी पड़ती है। जिस प्रकार एक नन्हें से बीज में वृक्ष बनने की शक्ति या क्षमता होती है। ठीक इसी प्रकार मनुष्य में महान बनने की, सर्वसमर्थ बनने की एवं शक्तिशाली बनने की क्षमता होती है। कुंडली जागरण के लिए साधक को शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक स्तर पर साधना या प्रयास पुरुषार्थ करना पड़ता है। जप, तप, व्रत-उपवास, पूजा-पाठ, योग आदि के माध्यम से साधक अपनी शारीरिक एवं मानसिक, अशुद्धियों, कमियों और बुराइयों को दूर कर सोई पड़ी शक्तियों को जगाता है। अत: हम कह सकते हैं कि विभिन्न उपायों से अपनी अज्ञात, गुप्त एवं सोई पड़ी शक्तियों का जागरण ही कुंडली जागरण है। योग और अध्यात्म की भाषा में इस कुंडलीनी शक्ति का निवास रीढ़ की हड्डी के समानांतर स्थित छ: चक्रों में माना गया है। कुण्डलिनी की शक्ति के मूल तक पहुंचने के मार्ग में छ: फाटक है अथवा कह सकते हैं कि छ: ताले लगे हुए है। यह फाटक या ताले खोलकर ही कोई जीव उन शक्ति केंद्रों तक पहुंच सकता है। इन छ: अवरोधों को आध्यात्मिक भाषा में षट्-चक्र कहते हैं। ये चक्र क्रमश: इस प्रकार है: मूलधार चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र, मणिपुर चक्र, अनाहत चक्र, विशुद्धाख्य चक्र, आज्ञाचक्र। साधक क्रमश: एक-एक चक्र को जाग्रत करते हुए। अंतिम तक पहुंचता है।..................
25 March 2013
एक अमीर आदमी था. उसने समुद्र मेँ अकेले घुमने के लिए एक नाव बनवाई.
छुट्टी के दिन वह नाव लेकर समुद्रकी सेर करने निकला. आधे समुद्र तक पहुचा ही था कि अचानक
एक जोरदार तुफान आया. उसकी नाव पुरी तरह से तहस-नहस हो गई लेकिन वह लाईफ जेकेट की मदद से
समुद्र मेँ कुद गया. जब तुफान शांत हुआ तब वह तेरता तेरता एक टापु पर पहुचा लेकिन वहाभी कोई नही था.
टापु के चारो और समुद्र के अलावा कुछ भी नजर नही आ रहा था. उस आदमी ने सोचा कि अब पुरी जिदंगी मेँ
किसी का कभी भी बुरा नही किया तो मेरे साथ ऐसा क्यु हुआ..? उस आदमी को लगा कि भगवान ने मौत सेबचाया तो आगे
का रास्ता भी भगवान ही बताएगा. धीरे धीरे वह वहा पर उगे झाड-पत्ते खाकर दिन बिताने लगा.
अब धीरे-धीरे उसकी श्रध्दा टुटने लगी भगवान पर से उसका विश्वास उठ गया. उसको लगा कि इस दुनिया मेँ भगवान है
हि नही.! फिर उसने सोचा कि अब पुरी जिंदगी यही इस टापु पर बितानी है तो क्यु ना एक झोपडी बना लु..?
फिर उसने झाड कि डालियो और पत्तो से एक छोटी सी झोपडी बनाई. उसको लगा कि, हाश, आज से झोपडी मेँ सोने
को मिलेगा आज से बाहर नही सोना पडेगा.रात हुई
ही थी कि अचानक मौसम बदला बिजलीया जोर जोर से गिडगिराने लगी.! तभी अचानक एक बिजली उस झोपडी पर आ
गिरी और झोपडी धधकते हुए जलने लगी. यह देखकर वह आदमी टुट गया आसमान की तरफ देखकर बोला तु भगवान नही , राक्षस है,
तुजमे दया जैसा कुछ है ही नही तु बहुत क्रुर है. हताश होकर सर पर हाथ रखकर रो रहा था. कि अचानक एक नाव टापु के पास आई.
नाव से उतरकर दो आदमी बाहर आये. और बोले कि, हम तुमे बचाने आये है, तुम्हारा जलता हुआ झोपडा देखा तो लगा कि कोई
उस टापु पर मुसीबत मेँ है.! अगर तुम अपनी झोपडी नही जलाते तो हमे पता नही चलता कि टापु पर कोई है! उस आदमी कि आँखो से आँसु
गिरने लगे. उसने ईश्वर से माफी माँगी और बोलाकि मुझे क्या पता कि आपने मुझे बचाने के लिए मेरी झोपडी जलाई थी !
एक जोरदार तुफान आया. उसकी नाव पुरी तरह से तहस-नहस हो गई लेकिन वह लाईफ जेकेट की मदद से
समुद्र मेँ कुद गया. जब तुफान शांत हुआ तब वह तेरता तेरता एक टापु पर पहुचा लेकिन वहाभी कोई नही था.
टापु के चारो और समुद्र के अलावा कुछ भी नजर नही आ रहा था. उस आदमी ने सोचा कि अब पुरी जिदंगी मेँ
किसी का कभी भी बुरा नही किया तो मेरे साथ ऐसा क्यु हुआ..? उस आदमी को लगा कि भगवान ने मौत सेबचाया तो आगे
का रास्ता भी भगवान ही बताएगा. धीरे धीरे वह वहा पर उगे झाड-पत्ते खाकर दिन बिताने लगा.
अब धीरे-धीरे उसकी श्रध्दा टुटने लगी भगवान पर से उसका विश्वास उठ गया. उसको लगा कि इस दुनिया मेँ भगवान है
हि नही.! फिर उसने सोचा कि अब पुरी जिंदगी यही इस टापु पर बितानी है तो क्यु ना एक झोपडी बना लु..?
फिर उसने झाड कि डालियो और पत्तो से एक छोटी सी झोपडी बनाई. उसको लगा कि, हाश, आज से झोपडी मेँ सोने
को मिलेगा आज से बाहर नही सोना पडेगा.रात हुई
ही थी कि अचानक मौसम बदला बिजलीया जोर जोर से गिडगिराने लगी.! तभी अचानक एक बिजली उस झोपडी पर आ
गिरी और झोपडी धधकते हुए जलने लगी. यह देखकर वह आदमी टुट गया आसमान की तरफ देखकर बोला तु भगवान नही , राक्षस है,
तुजमे दया जैसा कुछ है ही नही तु बहुत क्रुर है. हताश होकर सर पर हाथ रखकर रो रहा था. कि अचानक एक नाव टापु के पास आई.
नाव से उतरकर दो आदमी बाहर आये. और बोले कि, हम तुमे बचाने आये है, तुम्हारा जलता हुआ झोपडा देखा तो लगा कि कोई
उस टापु पर मुसीबत मेँ है.! अगर तुम अपनी झोपडी नही जलाते तो हमे पता नही चलता कि टापु पर कोई है! उस आदमी कि आँखो से आँसु
गिरने लगे. उसने ईश्वर से माफी माँगी और बोलाकि मुझे क्या पता कि आपने मुझे बचाने के लिए मेरी झोपडी जलाई थी !
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कल जब मैं मर जाऊँगा। तब तुम मेरे लिए आंसू बहाआगे पर मुझे पता नही चलेगा तो उसके बजाय आज तुम मेरी इम्पॉर्टन्टस को महसूस क...



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